Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 78, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 78, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 78 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
तरत्तारतरारावधाराधरसमुद्भवैः ।
बुद्बुदैः परिसंदिग्धप्रोह्यमाणमहाचलः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, उस समय समुद्र मे
जो महागर्जना कर रहे मेघों से बुलबुले उठ रहे थे, उनको देखकर यह सन्देह हो रहा था कि ये
महापर्वत तो नहीं बह रहे हैं