Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 79, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 79, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 79 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
अन्तरिक्षगतो देहो यथा स्वप्ने विलोक्यते ।
बोधे तद्वासनाशान्तौ न किंचिदपि लक्ष्यते ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे स्वप्न मे आकाशगामी यह शरीर दीखता है, किन्तु जाग्रतकाल में नहीं
दीखता, वैसे ही वासना रहने पर ही यह शरीर दीखता है तत्त्वज्ञान होने पर जब प्राणी की वासना
बिल्कुल शान्त हो जाती है तब कुछ भी नहीं दीखता