Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 79, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 79, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 79 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
तत्क्षयाच्छममायाति द्रष्टृदृश्यदृगामयः ।
तत्सत्तायामुदेतीयं संसृत्याख्या पिशाचिका ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
अतएव एकमात्र वासना के क्षय से ही सूष्ष्मशरीरक्षय द्वारा सम्पूर्ण अनर्थो का क्षय सिद्ध है, यह
कहते हैं /
वासना के क्षय से द्रष्टा, दृश्य और दर्शनरूप रोग शान्त हो जाता है था वासना की सत्ता रहने
पर यह संसृतिनामक पिशाचिका उदित होती है