Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 79, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 79, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 79 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
संविदंशपरावृत्तिमात्रे पेलवरूपिणि ।
बन्धदृङ्मोक्षदृक् चेति क्लेशस्तत्साधनं कियत् ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
'मैं बद्ध हूँ” इस भावना से बन्धदर्शन और भे नित्यमुक्त हूँ", इस भावना से मोक्षदर्शन
जब आत्मा को अत्यन्त कोमलात्मा एकमात्र संविदंश के परिवर्तनमात्र से प्राप्त होता है तब भला
उसके साधन में क्लेश ही कितना है 2