Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 79, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 79, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 79 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
अजडं वेदनं सुप्तं मोक्ष इत्यभिधीयते ।
प्रबुद्धं बन्ध इत्याहुर्यदिच्छसि तदाहर ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
सुप्त ओर अजड वेदन "मोक्ष"
कहलाता है तथा प्रबुद्ध वेदन को तत्त्वज्ञानी लोग बन्ध कहते हैं इसलिए इन दोनों मेँ आपको
जिसकी इच्छा हो उसे चुन लीजिये