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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 79, Verse 42

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 79, verse 42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 79 · श्लोक 42

संस्कृत श्लोक

निर्वाणवासनमनन्तमनाद्यमच्छबोधैकतानमपयन्त्रणमस्तशङ्कम् । अद्वैतमैक्यरहितं च निरस्तशून्यमाकाशकोशविशदाशयशान्तमास्व ॥ ४२ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, बन्ध -मोक्ष आदि की सारी शंकाएँ छोडकर आप निवार्णरूप, वासनाशून्य, अनन्त, अनादि, स्वच्छ बोधस्वरूप, अद्वैत और एेक्यसे रहित, अशून्य (परिपूर्ण) ब्रह्मस्वरूप बनकर आकाशकोश के सदुश विशद्‌ अन्तःकरण से युक्त, शान्त एवं बन्धन से बिलकुल मुक्त होकर स्थित रहिये