Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 79, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 79, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 79 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
अथ ते द्वादशादित्यास्तमेवोद्देशमागताः ।
बद्धपद्मासनास्तस्थुस्तथैवाशु यथैव ते ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
उसके बाद की घटना बतलाते हैं /
हे श्रीरामचन्द्रजी, तदनन्तर उसी स्थान पर वे प्रलय के बारह सूर्य भी आये ओर पद्मासन
लगाकर वे भी सब भूत तुरंत उन्हींकी तरह बैठ गये, जिस तरह ये देवता और ऋषि बैठे हुए
थे