Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 8, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 8, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 8 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
हेम्नीव कटकादित्वं संसारोदरकोटरः ।
चिच्चमत्कार एवायमविकल्पनसंक्षयः ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे
सुवर्ण मेँ कटक आदि है वैसे ही जिसने अपने उदरकोटर में संसार को धारण कर रखा है ऐसा
यह चिति का चमत्कार ही सब कुछ है तथा संकल्प-विकल्प न करने से ही इसका नाश होता
है