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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 80, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 80, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 80 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

अथ ते द्वादशादित्या ब्रह्मणि ब्रह्मतां गते । जगद्वद्ब्रह्मलोकं तमदहन्भास्वरार्चिषः ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

इसके अनन्तर जब विधाता की देह मायाशबल ब्रह्मरूपता को प्राप्त हो गई तब पूर्वोक्त वे उन बारह आदित्यों ने, जो प्रकाशमयी ज्वालाओं से युक्त थे, पृथिवी आदि की तरह उस ब्रह्मलोक को भी भस्मीभूत बना डाला