Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 80, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 80, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 80 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
तानि तस्य मुखान्याहुस्तपद्रूपाणि सर्वतः ।
कर्मेन्द्रियाणि विषयास्ते हि तस्य भुजा दश ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
वाक्, पाणि, पाद,
गुदा, उपस्थ नामक जो पाँच कर्मेन्द्रियाँ हैं ये उसकी दाहिनी भुजाएँ है तथा वचन, आदान,
विहरण, उत्सर्ग ओर आनन्द नामक ये जो उन पाँच कर्मेन्द्रियों के पाँच विषय हैं वे ही पाँचों
विषय उसकी बायीं भुजाएँ है-इस क्रम से उसकी दस भुजाएँ हैं