Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 80, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 80, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 80 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
चिदाकाशगते स्फारे भूताकाशे स तिष्ठति ।
देहे च सर्वभूतानां नित्यं वायुरिवेश्वरः ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
चिदाकाशगत विशाल भूताकाश में तथा समस्त भूतों की देह में वायुके
समान वह परमेश्वर नित्य स्थित रहता है