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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 80, Verse 34

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 80, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 80 · श्लोक 34

संस्कृत श्लोक

अथ तस्य मुखं स्फारं ज्वालामालाकुलान्तरम् । प्राणाकृष्टो महाम्भोधिर्वाडवाग्निमिवाविशत् ॥ ३४ ॥

हिन्दी अर्थ

इसके अनन्तर श्वासवायु से आकृष्ट महासागर उनके विशाल मुख में, जिसका भीतरी भाग ज्वालामालाओं से व्याप्त था, ऐसे प्रविष्ट हो गया, जैसे बड़वानल में