Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 80, Verse 35
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 80, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 80 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
स एव वाडवो भूत्वा वह्निराकल्पमर्णवे ।
अहंकारः पिबत्यम्बु रुद्रः सर्वं तु तत्तदा ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
अन्य काल में भी जल सूख जाने पर तेज में ही उका उयसलार ग्रसिद्ध है इस आशय
से कहते हैं /
वही अहंकाररूप रुद्र कल्पपर्यन्त समुद्र में बड़वानल होकर अवस्थित रहता है, परन्तु जब
प्रलयकाल आ जाता है तब वह समुद्र के उस सारे जल को पी जाता है