Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 80, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 80, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 80 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
तत एकार्णवापूरो विरिञ्चनगरान्तरम् ।
रात्रौ भुवमिव ध्वान्तं पूरयामास सूर्मिमान् ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
उसके बाद का दृश्य कैसा था, यह कहते हैं /
तदनन्तर सुन्दर विशाल तरंगों से युक्त महासागर की बाढ़ ने विधाता के नगरान्तर को ऐसे
परिपूर्ण कर दिया, जैसे रात में सारी पृथिवी को अन्धकार