Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 80, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 80, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 80 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
आब्रह्मलोकमभवज्जगदापूर्णमर्णसा ।
तुल्यं रसैकपूर्णेन पक्वद्राक्षाफलेन तत् ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
ब्रह्मलोकपर्यन्त वह सारा जगत्,
केवल एकमात्र रससे परिपूर्ण पके हुए अंगूर के फल के सदृश, जल से परिपूर्ण हो गया