Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 80, Verse 43
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 80, verse 43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 80 · श्लोक 43
संस्कृत श्लोक
तृतीयोऽत्र पदार्थोऽभूदूर्ध्वं ब्रह्माण्डभागभूः ।
दृष्टिक्षयात्सुदूरत्वाद्दुर्लक्ष्यगगनासितः ॥ ४३ ॥
हिन्दी अर्थ
उनमें
तीसरा पदार्थ ब्रह्माण्ड का ऊर्ध्वभाग स्थित था । बहुत दूर होने के कारण यहाँ तक आँखों
की ज्योतियों की पहुँच न हो सकने से वह दुर्लक्ष्य काले वर्ण के आकाश के सदृश था