Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 80, Verse 49
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 80, verse 49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 80 · श्लोक 49
संस्कृत श्लोक
ततस्तथैव विमलं नभो दशगुणं स्मृतम् ।
ततः परममत्यच्छं ब्रह्माकाशमनन्तकम् ॥ ४९ ॥
हिन्दी अर्थ
उसके बाद उस पवन के समान ही दशगुना विमल आकाश स्थित है ।
(प्रथम प्रश्न का उत्तर देते &// हे श्रीरामचन्द्रजी, तदनन्तर परम पवित्र, अतिसूक्ष्म होने के कारण
अत्यन्त ही स्वच्छ अनन्त मायाशबल ब्रह्माकाश स्थित हे