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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 15

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 81, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

विश्वरूपमयार्कादिशिरःकमलजालकैः । कृतमालामलालोकवातवह्निमयाञ्चला ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

नाना वर्णो के सूर्य आदि देव तथा दानवं के मस्तकरूपी कमलो के समूहों की माला उसके कण्ठ में विराजमान थी, निर्मल आलोकवाला पवनसे प्रदीप्त अग्नि उसका ओंचल था