Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 81, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
दन्तेन्दुमालाविमला विमलोद्दयोतपाततः ।
तमोर्णवोर्द्ध्वलेखेव वृत्तावर्तविवर्तिनी ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
चूँकि दन्तरूपी चनद्रमाला से वह
विमल थी, इसलिए विमल दाँतों के प्रकाशो के पतन से अभिवृद्ध तथा अन्धकाररूपी सागर के
आवर्तो से व्यालोल (चंचल) ऊर्ध्वलेखा-जैसी स्थित वह प्रतीत हो रही थी