Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 81, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
बृहत्तरङ्गोर्ध्वभुजा श्यामलोल्लासशालिनी ।
एकार्णवोर्मिमालेव नृत्तावृत्तिविवर्तिनी ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
महातरंगरूपी लम्बी भुजाओंवाली, श्यामल तथा
उल्लासो से परिपूर्ण, नृत्यरूपी आवर्तो से चंचल प्रलयकालीन महासागर की तरंगमाला-सी भास
रही थी