Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 81, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
नृत्यद्भुजलतापुष्पैर्नखशुभ्राभ्रमण्डलैः ।
पूर्णचन्द्रशतानीव भ्रमन्ती नभस्तले ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
नाच रही भुजलतारूपी
पुष्पों से युक्त नखों की शुभ्र प्रभारूपी मेच-मण्डलों से वह आकाशतल में सैकड़ों पूर्णचन्द्रो को
नचाती हुई-सी प्रतीत हो रही थी