Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 32
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 81, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 32
संस्कृत श्लोक
अप्यनन्ते महाव्योम्नि पारं प्राप्तैः शिरोरुहैः ।
कुर्वाणेवाततं वासं चरत्तिमिरदन्तिनः ॥ ३२ ॥
हिन्दी अर्थ
अनन्त महाकाश में भी पारंगत
अपने केशों से वह संचरणशील अन्धकाररूपी हाथी का आकाश में विस्तृत निवास मानों सिद्ध कर
रही थी