Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 81, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
यावत्तयाऽऽवृऽता देहे हेलावलनसारया ।
माला मलयकेलाससह्यमन्दरमेरुभिः ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
इतने ही में मैं क्या देखता हूँ कि एकमात्र विलासपूर्वक नृत्य करना ही जिसका अभिप्रेत
अर्थ था ऐसी उस भगवती काली ने मलय, कैलास, सह्य, मन्दर, मेरु आदि पर्वतों से एक सुन्दर
माला बनाकर अपनी देह में धारण कर लिया