Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 42
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 81, verse 42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
स्तनास्तस्यास्तु चत्वारः स्रवद्घर्मपयोलवाः ।
वेदाः सकलशास्त्रार्थचतुःसंस्थानचूचुकाः ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, उस कालरात्रि के धर्मरूपी दूध का क्षरण करनेवाले चारों वेद चार स्तन थे, समस्त
शास्त्ररूपी क्षीरवाले ऋक् आदि चार संस्थान उसके स्तनाग्र थे