Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 81, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
मुक्तालतादिकं नद्यः कालिन्दीत्त्रिपथादिकाः ।
धर्माधर्मावुभौ कर्णभूषणे चान्यकर्णयोः ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, यमुना, त्रिपथगा-भागीरथी आदि नदियाँ गले के मोती आदि के हार के रूप में
थीं, धर्म एवं अधर्म दोनों दूसरे कानों के (पूर्वोक्त कानों से अतिरिक्त कानों के) भूषण बन गये
थे