Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 81, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
तस्या अङ्गेषु दृष्टानि पुराणि नगराणि च ।
ऋतवश्च त्रयो लोका मासाहोरात्रमालिकाः ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, उस भगवती काली के अंगो में
नगर, ग्राम, ऋतु, मास, दिन-रात तथा तीनों लोककी मालाएँ विराज रही थीं - वह सब मैंने
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