Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 81, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
स्रजः कुलाचलाः शृङ्गवनपत्तनगुच्छकाः ।
जरत्पुरवनद्वीपग्रामपेलवपल्लवाः ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
शिखरो, वनों एवं नगरों
के गुच्छकों से परिपूर्ण तथा जीर्ण-शीर्ण गाँव, वन, द्वीप, ग्राम आदि रूप कोमल पल्लवो से भरे
सातां कुलपर्वत उसके गले की मालाएँ थीं