Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 44
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 81, verse 44 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 44
संस्कृत श्लोक
चतुर्दशविधा भूतजातयो याः सुरादिकाः ।
तस्याः शरीरशालिन्यास्ता लोमावलयः स्थिताः ॥ ४४ ॥
हिन्दी अर्थ
जो देवता आदि चौदह तरह की भूतजातियाँ हैं, वे
शरीरधारी उस कालरात्रि के रोमपंक्तियों के रूप मेँ अवस्थित थीं