Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 45
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 81, verse 45 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 45
संस्कृत श्लोक
तस्याश्च नगरग्रामगिरयो देहशायिनः ।
नृत्यन्त्या सह नृत्यन्ति पुनर्जन्म मुदेव ते ॥ ४५ ॥
हिन्दी अर्थ
उसकी देह में अव्यक्तरूप
से स्थित नगर, ग्राम, पर्वत आदि मानों अपना पुनर्जन्म पाने के आनन्द से उसके साथ-साथ नाच
कर रहे थे