Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 49
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 81, verse 49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 49
संस्कृत श्लोक
सा न नृत्यति तत्सर्वं सशैलवनकाननम् ।
जगन्नृत्यति नानात्म मृत्वा पुनरुपागतम् ॥ ४९ ॥
हिन्दी अर्थ
किसी समय वह नृत्य से विरत भी हो जाती थी, फिर भी उसके भीतर का जगत् तो नृत्य
करता-त्रा ही प्रतीत होता था, यह कहते है /
कभी तो वह नृत्य नहीं भी करती थी, परन्तु शैल, पर्वत, अरण्य आदि के साथ वह नानारूप
जगत्, जो मरकर फिर आया था, नृत्य करता ही रहा