Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 50
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 81, verse 50 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 50
संस्कृत श्लोक
तज्जगन्नर्तन चारु तद्देहादर्शसंस्थितम् ।
चिरं मया तदा दृष्टमविनष्टं पुनः स्थितम् ॥ ५० ॥
हिन्दी अर्थ
उक्त सुन्दर जगत् का नृत्य उसी के
देहरूपी दर्पण मेँ स्थित था और उस समय ने वीर्घकालतक उसे देखा, वह एकदम अविनाशी
होकर स्थित था यानी निरन्तर चल रहा था