Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 51
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 81, verse 51 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 51
संस्कृत श्लोक
विचलत्तारकाजालं भ्रमत्पर्वतमण्डलम् ।
मशकव्यूहवद्वातव्याधूतामरदानवम् ॥ ५१ ॥
हिन्दी अर्थ
उसी जयत् के नृत्य का वर्णन करते हैं /
वह नृत्य क्या था, उससे समस्त तारागण चल रहे थे, सारा पर्वतसमूह घूम रहा था, अमर
(देवता) और दानव मच्छरों के समूह के समान वायुओं द्वारा कम्पित किये जा रहे थे