Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 57
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 81, verse 57 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 57
संस्कृत श्लोक
पुराणि घर्घरारावैर्दृश्यन्ते लुतितान्यधः ।
सगृहाट्टालवास्तव्यं न च किंचिल्लुठत्यधः ॥ ५७ ॥
हिन्दी अर्थ
किसी समय घर,
अट्टालिका एवं गृहस्थी के सामान के साथ नगर घरघर ध्वनि करते हुए नीचे की ओर लुढकते हुए
दीख रहे थे, लेकिन वास्तव में कुछ नीचे की ओर नहीं लुढक रहा था