Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 56
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 81, verse 56 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 56
संस्कृत श्लोक
अत्यजन्तः समुद्राश्च मर्यादामुद्रणं द्रुमाः ।
भूमेर्नभस्तलं यान्ति नभसो यान्ति भूतलम् ॥ ५६ ॥
हिन्दी अर्थ
समुद्र भी अपनी मर्यादा का मुद्रण न छोड़कर नाच रहे थे और वृक्ष
पृथ्वी से कभी आकाश में तथा आकाश से कभी पृथ्वी में आते-जाते थे