Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 81, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
यावद्विचारयाम्याशु तावत्तस्य तदा पुरः ।
सा स्थिता परिनृत्यन्ती विस्तीर्णा श्रीत्रिलोचना ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
यह
मैं जब विचार कर रहा था कि इतने में तत्क्षण ही वह उस समय नाच करती हुई भगवान् रुद्र के सामने
आकर खड़ी हो गई । डील-डौल में विशाल वह अपनी सुन्दर तीन आँखों से शोभित हो रही थी