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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verses 1–6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 81, verses 1–6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । अथ राघव रुद्रं तं तदा तस्मिन्महाम्बरे । प्रवृत्तं नर्तितुं मत्तमपश्यं वितताकृतिम् ॥ १ ॥ व्योमेवाकृतिमापन्नमजहद्व्यापितां निजाम् । महाकारं घनश्यामं दशाशापरिपूरकम् ॥ २ ॥ अर्केन्दुवह्निनयनं चलद्दशदिगम्बरम् । घनदीर्घप्रभाजालमालानं श्यामलार्चिषाम् ॥ ३ ॥ वडवाग्निदृशं लोलभुजोर्मिभरभासुरम् । एकार्णवार्णो द्राग्देहबन्धेनेव समुत्थितम् ॥ ४ ॥ पश्याम्यनन्तरमहं यावत्तस्य शरीरतः । छायेव परिनिर्याति नर्तनानुविधायिनी ॥ ५ ॥ सूर्येष्वविद्यमानेषु महातमसि चाम्बरे । स्थिता कथमियं छाया भवेदिति मतिर्मम ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

किमकरोक्‌^ छाया5उस्िद्रद का युन“ इन प्रश्नो का उत्तर देने के लिए उपक्रम बोधते है/ महाराज वसिष्ठजी ने कहा : हे राघव, इसके बाद मैंने उस महाकाश में मत्त उस रुद्र भगवान्‌ को नृत्य करने में प्रवृत्त देखा, उस समय उनका आकार बहुत दूर तक फैला हुआ था, आकाश के सदृश उन्होने विशाल आकृति प्राप्त की थी, अपनी व्यापकताका उन्होने त्याग नहीं किया था, उनका वह आकार महान्‌ था, मेघ के सदुश उनका श्याम वर्ण था, उनसे दसो दिशाएँ चारों ओर से खूब व्याप्त थीं, सूर्य, चन्द्र ओर अग्नि-ये तीनों उनके तीन नेत्र थे, चंचल दसों दिशाएँ ही उनके वस्त्र के स्थान में थीं, घन तथा दीर्घ प्रभाजाल से वे युक्त थे, इसीलिए वे देखने में नील प्रभाज्वालाओं के बन्धनस्तम्भ-जैसे मालूम पड़ रहे थे, बड़वाग्नि की तरह तो उनकी आँखें थीं, चंचल भुजारूपी तरंगमालाओं से उनका शरीर खूब चमकीला दीख रहा था, इससे ऐसा प्रतीत हो रहा था कि मानों सबको जलमय बनानेवाले प्रलयकाल के महासागर का जल ही शरीर ग्रहण कर अभी आविर्भूत हुआ हो । इसके अनन्तर मैं क्या देखता हूँ कि भगवान्‌ रुद्र के नृत्य का अनुकरण करती हुई उनके शरीर से मानों छाया निकल रही है।।१-५॥ देखते ही बलात्‌ मेरे मन में ऐसी आशंका उठी कि भला सूर्यो के उपस्थित न रहते महान्‌ अन्धकार से परिपूर्ण आकाश में यह छाया कैसे स्थित है

सर्ग सन्दर्भ

अस्सीवाँ सर्ग समाप्त ड्क्यासीवाँ सर्ग॑ प्रलयकाल में नृत्य कर रहे भयंकर रुद्र तथा जगदरपी अंगवाली उसकी छाया कालरात्रि का वर्णन ।