Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 70
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 81, verse 70 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 70
संस्कृत श्लोक
प्रोह्यन्ते यन्त्रवच्छैला निपतन्ति नभश्चराः ।
लुठन्त्यमरगेहानि वलिते देहदर्पणे ॥ ७० ॥
हिन्दी अर्थ
उसका देहरूपी दर्पण जब कुछ भ्रमणशील हो गया, तब यन्त्रोके सदृश पर्वत विचलित
होने लगे, आकाशचारी देवता गिरने लगे ओर देवताओं के घर लुढकने लगे