Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 69
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 81, verse 69 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 69
संस्कृत श्लोक
तदङ्गजजगद्वस्तुजातभ्रमणसंभवात् ।
दृष्टिर्धीरापि मे मोहे सन्ना सेनेव संगरे ॥ ६९ ॥
हिन्दी अर्थ
उसके अंगों से जनित जगत्पदार्थो के साथ-साथ जो
भ्रमण हुए, उनसे उत्पन्न श्रम के कारण मेरी धीर दृष्टि ऐसे कुण्ठित हो गई, जैसे युद्ध संग्राम में
सेना