Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 68
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 81, verse 68 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 68
संस्कृत श्लोक
नभःकरशतैस्तस्याश्चतुरावृत्तिवर्तिभिः ।
भाति चण्डानिलोद्धूतैराकीर्णमिव पल्लवैः ॥ ६८ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, सारा आकाशमण्डल उस
भगवती के चातुर्यपूर्णं पद्धति से संचालित हुए सैकड़ों हाथों के कारण प्रचण्ड वायुओं द्वारा कम्पित
पल्लवो से व्याप्त-सा हो गया था