Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 67
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 81, verse 67 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 67
संस्कृत श्लोक
बृहन्नासागुहागेहनिर्गता घनघुंघुमाः ।
तत्रोग्रा वायवो वान्ति घोरघूत्कारकारिणः ॥ ६७ ॥
हिन्दी अर्थ
कालरात्रि की श्वासवायुओं का वर्णन करते हैं /
उस भगवती के बड़े-बड़े नासिकागुहारूपी घरों से निकले हुए मेच के सदृश घुंघुं शब्द कर रहे
उग्र पवन बह रहे थे, इन वायुओं से घोर घुंघुं शब्द हो रहे थे