Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 72
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 81, verse 72 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 72
संस्कृत श्लोक
सह्या मह्यामिव खगा विन्ध्या विद्याधरा इव ।
वृक्षावर्ते भ्रमन्तोऽन्ता राजहंसा इवाम्बरे ॥ ७२ ॥
हिन्दी अर्थ
उस भगवती की देह में अनेक सह्य पर्वत पृथ्वीपर पक्षियों के सदृश,
अनेक विन्ध्याचल आकाश में विद्याधरो के सदुश तथा वृक्ष ओर बादल आकाश के अन्दर घूम रहे
राजहंसं के सदृश भास रहे थे