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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 73

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 81, verse 73 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 73

संस्कृत श्लोक

द्वीपान्यपि तृणानीव समुदा वलया इव । सुरलोकालयः पद्मा आसंस्तद्देहवारिणि ॥ ७३ ॥

हिन्दी अर्थ

उसके देहरूपी सरोवर में अनेक द्वीप तृणों के सदृश, समुद्र वलयो के सदृश और देवताओं के आलय पद्मो के सदृश भास रहे थे