Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 83, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 83, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 83 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
अतः स कल्पान्तशिवो रुद्रो रौद्राकृतिर्द्रुतम् ।
यन्नृत्यति हि तद्विद्धि चिद्धनस्पन्दनं निजम् ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए हे श्रीरामचन्द्रजी,
प्रलयकाल में वह भगवान् शंकर भयंकर आकृतिवाले रुद्र होकर जो शीघ्र नृत्य करते हैं, उसे आप
चिद्घन का निजी स्पन्दन ही समझिये