Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 83, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 83, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 83 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
स्वयमन्तः कचत्कान्तिश्चिदाकाशः स्वभावखे ।
अयं सोहमयं च त्वं करोतीत्यादिकल्पनम् ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
कल्पना किया करता है