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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 83, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 83, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 83 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

मया दृष्टा तदाकाशमेव शान्तं तदाकृतिः । मयेव तत्परिज्ञातं नान्यः पश्यति तत्तथा ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

तत्त्वदृष्टि से मैने उस भयानक आकृति को उस समय शान्त चिदाकाशमात्र देखा | वस्तुतः अकेले मैंने ही उसे जाना, तत्त्वदृष्टि से हीन कोई प्राणी उसे वैसा नहीं देखता