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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 83, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 83, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 83 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

यथा नाम स कल्पान्तः स रुद्रः सा च भैरवी । मायामात्रं तथा सर्वं परिज्ञातमलं मया ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, वह कल्पान्त, वह रुद्र ओर वह भैरवी-ये सबके सब जिस तरह मायामात्र हैँ, यानी कल्पादि सबके सब जैसे मायामात्र है, यह सब मैंने अच्छी तरह तत्त्वज्ञान हो जाने के कारण तत्त्वदृष्टि से जैसे जान लिया