Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 84, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 84, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 84 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
चिद्रूपस्य तथाप्यन्तः सत्संकल्पपुरं भवेत् ।
दृढध्यानाद्विशुद्धायाश्चितेर्भवतु सा कथम् ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
असत्य कयो ह 2 इस पर कहते हैं /
उक्त अनुभव के बल से पदार्थों की सत्यता होनेपर भी चेतनरूप का अचेतरूपमे प्रवेश न हो
सकने के कारण जगत् संकल्पनगर के सदृश मिथ्या ही होगा । जब दृढ़ ध्यान से चिति का आवरणरूप
मल हट जायेगा, तब वह प्रतिबिम्बित हो नहीं सकती, फिर सत्यता की चर्चा ही क्या ?