Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 84, Verse 46
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 84, verse 46 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 84 · श्लोक 46
संस्कृत श्लोक
स त्रैलोक्यमहारम्भः सत्योऽपि भ्रान्तिमात्रकम् ।
भ्रान्तिमात्रस्य के नाम लुठनालुठने वद ॥ ४६ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामभद्र, यों त्रैलोक्य
का महान् आरम्भ सत्य होते हुए भी केवल भ्रान्तिभात्र ही है । जो भ्रान्तिमात्ररूप है, उसका
लुढकना क्या मूल्य रखता है ? यह बतलाइये