Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 84, Verse 47
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 84, verse 47 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 84 · श्लोक 47
संस्कृत श्लोक
कदा स्वप्नपुरं सत्यं कदा स्वप्नपुरं मुधा ।
कदा स्वप्नपुरं भग्नं कदा स्वप्नपुरं स्थितम् ॥ ४७ ॥
हिन्दी अर्थ
कब स्वप्ननगर सत्य रहा, कब स्वप्ननगर
असत्य रहा, कब स्वप्ननगर नष्ट हुआ और कब वह स्थित रहा ?