Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 84, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 84, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 84 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
स्पन्दशक्तिस्तदिच्छेदं दृश्याभासं तनोति सा ।
साकारस्य नरस्येच्छा यथा वै कल्पनापुरम् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
सोऽकामयत बहु स्या प्रजायेय” इत्यादि से वह स्यन्दशक्ति ही शिवजी की इच्छा है, वह
इच्छा इस दृश्याभाय्का उम्र प्रकार विस्तार करती हैं, जिस प्रकार साकार पुरुष की इच्छा कल्पनात्मक
नगर का विस्तार करती है /
माया की जो स्पंदनशक्ति है, वही ब्रह्मरूप शिवजी की इच्छा है, वह इच्छा इस दुश्याभास का
उस प्रकार विस्तार करती है, जिस प्रकार साकार पुरुष की इच्छा कल्पनात्मक नगर का विस्तार
करती है